moral story in hindi

लापरवाह गिल्लू 


किसी बहोत बड़े जंगल में हिरण का एक झुण्ड रहता था | उस झुण्ड में एक सबसे बूढ़ा हिरण था, जो बहुत चालाक था और सभी हिरण उसका आदर करते थे | वह युवा हिरणो को सिखाता था की कैसे वे इस बड़े से जंगल में दूसरे खतरनाक जानवरो और शिकारियों से खुद की रक्षा कर सकते है| 

बूढ़े हिरण की एक बहन थी | एक दिन वह अपने बेटे को लेकर आयी और कहा - भइया मेरे बेटे को अपने जैसा चालाक और मजबूत बना दो | उसके बेटे का नाम गिल्लू था| 

बूढ़े हिरण ने गिल्लू की तरफ देखा और कहा - कल से तुम्हारी शिक्षा शुरू होगी, सूर्योदय से पहले आ जाना| 

अगले दिन से गिल्लू अपने समय से कक्षा में आने लगा | कक्षा में गिल्लू की मुलाकात दूसरे युवा हिरणो से हो गई और उन सब से गिल्लू की मित्रता भी हो गई|

अब वह अपना अधिक समय अपने दोस्तों के साथ खेलने-कूदने में बिताने लगा और प्रत्येक दिन कक्षा में देर से आने लगा | उसे इस बात का आभास भी नहीं था की आगे उसके साथ क्या होनेवाला है| 

एक दिन जब गिल्लू अपने दोस्तों के साथ खेल रहा था तभी वह शिकारी के फंदे में फंस गया | वह छुटकारा  पाने का बहोत प्रयास किया लेकिन वह असफल रहा | उसके सभी दोस्त भयभीत होकर अपने अपने घर भाग गए| 

जब  गिल्लू शाम तक अपने घर नहीं पहुंचा तब उसकी माँ बूढ़े हिरण के पास गई और पूछी - मेरा बेटा कहा है? क्या उसकी शिक्षा अच्छी तरह से चल रही है? 

बूढ़े हिरण ने कहा - तुम्हारा बेटा लापरवाह हो गया है, वह पढाई करने के बजाय हमेशा खेलता-कूदता रहता है | क्युकी वह तुम्हारा बेटा है इसलिए मैंने उसे शिक्षा देने का बहुत प्रयास किया लेकिन तुम्हारा बेटा मेरी आज्ञा मानाने से इंकार कर देता है| 

उसकी माँ को यह सुनकर बहुत बुरा लगा और अपने घर की ओर निकल गई | रास्ते में वह एक शिकारी को देखती है जो उसके बेटे को मारकर उसका मीट और चमड़े ले जा रहा था| 

शिक्षा - लापरवाही का भयंकर परिणाम हो सकता है|